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सारण में विजिलेंस का बड़ा एक्शन, 9 हजार रिश्वत लेते दरोगा मोहित मोहन गिरफ्तार

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डोरीगंज थाना के दरोगा पर विजिलेंस का शिकंजा, केस से नाम हटाने के बदले ले रहे थे घूस

सारण/आलम की खबर:बिहार के सारण जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां विजिलेंस टीम ने डोरीगंज थाना में तैनात एक दरोगा को रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। गिरफ्तार किए गए सब इंस्पेक्टर की पहचान मोहित मोहन के रूप में हुई है, जो 2018 बैच के अधिकारी बताए जा रहे हैं। विजिलेंस की टीम ने उन्हें उनके आवास से उस वक्त पकड़ा, जब वह एक केस में मदद करने के एवज में तय रकम ले रहे थे।

मामले के सामने आने के बाद यह साफ हो गया कि आम लोगों से सीधे जुड़े पुलिसिया कामकाज में अब भी रिश्वतखोरी जैसी शिकायतें गहरी चिंता का विषय बनी हुई हैं। विजिलेंस की यह कार्रवाई न सिर्फ संबंधित थाना क्षेत्र बल्कि पूरे जिले के पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बन गई है। शुरुआती पूछताछ के बाद आरोपी दरोगा को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पटना ले जाया गया, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है।

मारपीट के केस में नाम हटाने और डायरी में मदद का आरोप

जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला डोरीगंज थाना में दर्ज एक मारपीट से जुड़े केस से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस मामले में सब इंस्पेक्टर मोहित मोहन ने शिकायतकर्ता पक्ष से संपर्क कर पुलिस डायरी में मदद करने और प्राथमिकी से आरोपी का नाम हटाने के बदले पैसों की मांग की थी। कहा जा रहा है कि शुरुआत में उन्होंने 10 हजार रुपये की डिमांड रखी थी, लेकिन बाद में यह सौदा 9 हजार रुपये पर तय हुआ।

यही वह बिंदु था, जहां पीड़ित पक्ष ने मामले को दबाने या समझौते के रास्ते पर जाने के बजाय सीधे भ्रष्टाचार निरोधक तंत्र का सहारा लिया। शिकायतकर्ता ने विजिलेंस विभाग से संपर्क कर पूरी बात बताई और आरोप लगाया कि थाना स्तर पर कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए रिश्वत मांगी जा रही है। इस शिकायत के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और इसकी गोपनीय जांच शुरू कराई।

शिकायत सही मिली तो विजिलेंस ने बिछाया जाल

विजिलेंस विभाग को जब यह शिकायत मिली तो सबसे पहले इसकी सत्यता की पुष्टि की गई। सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक स्तर पर तथ्यों की जांच के बाद आरोपों में दम पाया गया। इसके बाद विजिलेंस टीम ने पूरी योजना के साथ ट्रैप ऑपरेशन तैयार किया। ऐसे मामलों में विभाग पहले शिकायत की विश्वसनीयता को परखता है, फिर तकनीकी और मानवीय स्तर पर निगरानी कर यह सुनिश्चित करता है कि आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा जा सके।

इसी रणनीति के तहत शिकायतकर्ता को तय समय पर आरोपी दरोगा तक पहुंचने को कहा गया। विजिलेंस की टीम पहले से सिविल ड्रेस में निगरानी कर रही थी। जैसे ही पैसों का लेन-देन हुआ, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सब इंस्पेक्टर मोहित मोहन को धर दबोचा। बताया जा रहा है कि मौके से 9 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए, जो कथित रिश्वत की रकम थी।

आवास से हुई गिरफ्तारी, मौके पर मची हलचल

यह कार्रवाई दरोगा के आवास पर हुई, जहां शिकायतकर्ता तय योजना के मुताबिक रकम देने पहुंचा था। विजिलेंस की टीम ने पूरी सतर्कता के साथ घेराबंदी कर रखी थी ताकि आरोपी को बच निकलने का कोई मौका न मिले। जैसे ही रकम हाथ में ली गई, टीम सक्रिय हो गई और दरोगा को रंगे हाथ पकड़ लिया गया। इस अचानक कार्रवाई से वहां मौजूद लोगों में भी हलचल मच गई।

गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने मौके पर जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी की और बरामद रकम को जब्त किया। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ शुरू की गई। इस दौरान पुलिस विभाग के भीतर भी यह चर्चा तेज हो गई कि थाना स्तर पर केस प्रभावित करने के लिए रिश्वत लेने की कोशिश आखिर किस तरह की कार्यशैली को दर्शाती है।

विजिलेंस डीएसपी ने कार्रवाई की पुष्टि की

मामले की पुष्टि करते हुए विजिलेंस के डीएसपी वसीम अहमद ने बताया कि डोरीगंज थाना क्षेत्र से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें संबंधित दरोगा पर केस में नाम हटाने और पुलिस डायरी में सहयोग के नाम पर पैसे मांगने का आरोप लगाया गया था। शिकायत की जांच कराई गई, जिसमें आरोपों की पुष्टि होने के बाद ट्रैप की कार्रवाई की गई।

उन्होंने कहा कि आरोपी को रिश्वत की रकम लेते हुए पकड़ा गया है और अब उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। साथ ही यह भी संकेत दिए गए हैं कि पूछताछ के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कहीं इस तरह की शिकायतें पहले भी तो नहीं रही हैं या किसी और स्तर पर भी कोई अनियमितता जुड़ी हुई है।

पूछताछ में खुल सकते हैं और भी पहलू

विजिलेंस की कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह एक अकेला मामला था या फिर थाना स्तर पर इस तरह की वसूली की कोई व्यवस्थित शिकायत पहले से मौजूद रही है। अक्सर ऐसे मामलों में पूछताछ के दौरान कई और तथ्य सामने आते हैं, जिससे जांच का दायरा बढ़ सकता है। यदि आरोपों की परतें और खुलती हैं, तो विभागीय कार्रवाई भी और सख्त हो सकती है।

मोहित मोहन 2018 बैच के सब इंस्पेक्टर बताए जा रहे हैं। ऐसे में एक युवा अधिकारी पर इस तरह के आरोप लगना पुलिस व्यवस्था की छवि पर भी असर डालता है। आम लोगों के लिए थाना न्याय और सुरक्षा की पहली सीढ़ी माना जाता है, लेकिन जब वहीं पर कानूनी प्रक्रिया को पैसे के बदले प्रभावित करने की कोशिश सामने आए, तो यह भरोसे पर सीधा आघात माना जाता है।

पुलिस महकमे में मचा हड़कंप, जनता ने सराहा एक्शन

इस गिरफ्तारी के बाद सारण पुलिस महकमे में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है। विभागीय स्तर पर भी इस घटना को बेहद गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला सीधे कानून के रखवालों की जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। वहीं आम लोगों के बीच विजिलेंस की इस कार्रवाई को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह शिकायतों पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई होती रही, तो सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी। लोगों ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में बिना दबाव के कार्रवाई होना जरूरी है, ताकि सरकारी पद पर बैठे लोगों को यह स्पष्ट संकेत मिले कि रिश्वतखोरी अब आसानी से छिप नहीं सकती।

भ्रष्टाचार पर सख्त संदेश

सारण में हुई यह कार्रवाई सिर्फ एक दरोगा की गिरफ्तारी भर नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे सिस्टम के भीतर मौजूद भ्रष्ट प्रवृत्तियों के खिलाफ एक कड़ा संकेत भी माना जा रहा है। विजिलेंस की टीम ने यह दिखा दिया कि यदि शिकायतकर्ता हिम्मत दिखाए और तथ्यात्मक शिकायत करे, तो कार्रवाई संभव है। यह मामला आने वाले दिनों में इसलिए भी अहम रहेगा क्योंकि इससे पुलिस विभाग के भीतर आंतरिक निगरानी और जवाबदेही को लेकर नई बहस तेज हो सकती है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी कार्रवाई आम जनता के मन में यह भरोसा जगाती है कि कानून का दायरा केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्दी पहनने वाले लोग भी उसके दायरे से बाहर नहीं हैं। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और आरोपी दरोगा पर कानूनी व विभागीय स्तर पर कितनी सख्ती होती है।

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